भारत इजरायल की इंश्योरेंस पॉलिसी है!" इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञ के बयान से मची हलचल, भारत-इजरायल रिश्तों पर कही बड़ी बात
भारत और इजरायल के रणनीतिक संबंधों को लेकर इजरायल की एक सुरक्षा एवं भू-राजनीतिक विशेषज्ञ का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जेरूसलम इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजी एंड सिक्योरिटी (JISS) से जुड़ी जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. ओश्रित बिरवाडकर ने एक लेख में भारत को इजरायल के लिए "इंश्योरेंस पॉलिसी" जैसा महत्वपूर्ण साझेदार बताया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा सुरक्षा चिंताओं, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और रणनीतिक हितों पर आधारित हैं।
डॉ. बिरवाडकर ने अपने लेख में भारत-इजरायल संबंधों के ऐतिहासिक विकास, दोनों देशों की सुरक्षा चुनौतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में रिश्तों में आई निकटता पर विस्तार से चर्चा की है। उनके बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है।
'भारत इजरायल के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी' क्यों कहा?
अपने लेख में डॉ. ओश्रित बिरवाडकर ने लिखा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत के दौरान कहा कि भारत में इजरायल को काफी समर्थन मिलता है और उनके सोशल मीडिया पेज पर बड़ी संख्या में भारतीय फॉलोअर्स हैं, तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं थी।
उनके अनुसार भारत में इजरायल के प्रति दिखाई देने वाला समर्थन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों देशों के बीच वर्षों से विकसित होता रणनीतिक विश्वास और साझा हित मौजूद हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत को इजरायल के लिए "इंश्योरेंस पॉलिसी" की तरह महत्वपूर्ण बताया।
हालांकि यह टिप्पणी डॉ. बिरवाडकर की व्यक्तिगत रणनीतिक व्याख्या है और इसे इजरायल सरकार का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।
भूगोल और सुरक्षा को बताया रिश्तों की नींव
लेख में डॉ. बिरवाडकर ने अमेरिका, भारत और इजरायल की भौगोलिक परिस्थितियों की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका की स्थिति दोनों देशों से अलग है।
उनका तर्क है कि अमेरिका दो महासागरों से घिरा है और उसकी सीमाएं ऐसे देशों से लगती हैं जिनसे उसे तत्काल सैन्य खतरा अपेक्षाकृत कम महसूस होता है। इसके विपरीत भारत और इजरायल की सीमाएं ऐसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं जहां लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियां बनी रही हैं।
उन्होंने लिखा कि यही साझा सुरक्षा चिंताएं दोनों देशों के बीच रणनीतिक सोच को मजबूत करती हैं और सहयोग को नई दिशा देती हैं।
इतिहास और पहचान का भी किया उल्लेख
डॉ. बिरवाडकर ने अपने लेख में कहा कि भारत और इजरायल दोनों स्वयं को प्राचीन सभ्यताओं के रूप में देखते हैं, जिन्होंने लंबे ऐतिहासिक संघर्षों और चुनौतियों के बाद आधुनिक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है।
उनके अनुसार दोनों देशों के समाज अपने अस्तित्व, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण रखते हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर समान सोच देखने को मिलती है।
यह विश्लेषण लेखक का दृष्टिकोण है, जिस पर विभिन्न विशेषज्ञों की अलग-अलग राय हो सकती है।
भारत-इजरायल संबंधों में बदलाव का उल्लेख
डॉ. बिरवाडकर ने लिखा कि शुरुआती दशकों में भारत ने इजरायल के साथ सीमित कूटनीतिक संबंध बनाए रखे। लेकिन समय के साथ भू-राजनीतिक परिस्थितियों, भारत की आर्थिक प्रगति और बदलते वैश्विक समीकरणों ने दोनों देशों को और करीब आने का अवसर दिया।
उन्होंने अपने लेख में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-इजरायल संबंधों के और मजबूत होने का उल्लेख किया। उनके अनुसार इस दौर में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिली।
यह टिप्पणी भी लेखिका का विश्लेषण है और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।
मोदी सरकार की भूमिका पर क्या कहा?
लेख में डॉ. बिरवाडकर ने दावा किया कि जब कई अंतरराष्ट्रीय नेता इजरायल के समर्थन को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इजरायल के समर्थन में स्पष्ट संदेश दिए।
उन्होंने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में भारतीय उपयोगकर्ता सक्रिय रहते हैं और विभिन्न मुद्दों पर इजरायल के पक्ष में अपनी राय व्यक्त करते हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर किसी भी समर्थन या ट्रेंड की प्रकृति समय, विषय और प्लेटफॉर्म के अनुसार बदल सकती है।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और इजरायल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।
डॉ. बिरवाडकर ने अपने लेख में उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े कई समझौतों पर भी काम आगे बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी दोनों देशों के बीच उच्च प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
भारत-इजरायल संबंधों का वर्तमान स्वरूप
भारत और इजरायल के संबंध आज केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं—
रक्षा और सुरक्षा
आतंकवाद विरोधी सहयोग
साइबर सुरक्षा
कृषि तकनीक
जल संरक्षण
स्टार्टअप और नवाचार
स्वास्थ्य
विज्ञान एवं अनुसंधान
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक
इन क्षेत्रों में पिछले वर्षों में कई संयुक्त परियोजनाएं और समझौते हुए हैं।
भारत की विदेश नीति क्या कहती है?
भारत लंबे समय से "रणनीतिक स्वायत्तता" (Strategic Autonomy) की नीति पर जोर देता रहा है। भारत इजरायल के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के साथ-साथ पश्चिम एशिया के अन्य देशों, विशेषकर अरब देशों और फिलिस्तीन के साथ भी अपने संबंधों को महत्व देता है।
भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के समर्थन की बात भी दोहराई है। इसलिए भारत की पश्चिम एशिया नीति बहुआयामी और संतुलित मानी जाती है।
विशेषज्ञों की अलग-अलग राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि डॉ. बिरवाडकर का लेख भारत-इजरायल संबंधों की एक रणनीतिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। हालांकि विभिन्न विश्लेषकों के विचार इस विषय पर अलग-अलग हो सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य में और मजबूत होगा, जबकि अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश जारी रखेगा ताकि पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ उसके संबंध सकारात्मक बने रहें।
इजरायल की सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. ओश्रित बिरवाडकर द्वारा भारत को "इजरायल की इंश्योरेंस पॉलिसी" बताया जाना दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने लेख में साझा सुरक्षा चुनौतियों, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और पिछले वर्षों में बढ़े सहयोग को इस संबंध की प्रमुख आधारशिला बताया है।
हालांकि यह लेख लेखिका का विश्लेषण और व्यक्तिगत दृष्टिकोण है, न कि इजरायल सरकार का आधिकारिक बयान। भारत और इजरायल के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, वहीं भारत अपनी व्यापक विदेश नीति के तहत क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी संतुलित संबंध बनाए रखने पर जोर देता है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

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